Wednesday, April 25, 2018

इन्सानियत बचाने को रखा उपवास

















"आज दिनाँक 15/04/18 रविवार को कांठ रोड, अकबर के किले के सामने "इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी" के अध्यक्ष राशिद सैफ़ी सोसाइटी के सदस्यों के साथ एक दिवसीय उपवास पर बैठे। समाज के गिरते स्तर, एवं शर्मसार हो रही, व मर रही इन्सानियत को ज़िन्दा रखने की ख़ातिर यह उपवास रखा गया।
इस सम्बंध में विस्तार से बताते हुए सोसाइटी के संस्थापक एवं अध्यक्ष राशिद सैफ़ी ने कहा कि आज हमारे समाज मे जो घृणित एवं शर्मनाक घटनाएं घट रही हैं जैसे (छोटी-छोटी बच्चियों से रेप एवं दरिंदगी, महिलाओं, लड़कियों से बलात्कार एवं शोषण, बेगुनाहों की हत्या, दंगा-फ़साद, तोड़फोड़, जात-पात, ऊँच-नीच का भेदभाव, आदि) इन सभी घृणित एवं शर्मनाक घटनाओं के लिये पूरी तरह हम इंसान ही जिम्मेदार हैं क्योंकि ये सभी शर्मनाक घटनाएं हम इंसान ही कर रहे हैं, कोई जानवर, पशु-पक्षी या पेड़-पौधे नहीं कर रहे। आज हमारे समाज को गंदा करने में हम इंसानों का ही हाथ है। और हम सभी इंसानों को सुधरने की ज़रूरत है चाहें वो सरकारों में बैठे लोग हों या आम इंसान हो। आज इसी सोच और मक़सद को ध्यान में रखते हुए इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी द्वारा ये एक दिवसीय उपवास रखा गया। सोसाइटी के अध्यक्ष सुबह 4 बजे सेहरी खाकर उपवास पर बैठे और शाम 7 बजे उपवास खोला। इस उपवास के ज़रिए किसी सरकार, शासन-प्रशासन से कोई मांग नहीं कि गयी, बल्कि ईश्वर के बनाये हुए सभी इंसानों से मांग की गयी कि *"इन्सानियत को बचा लो", "मानवता को बचा लो"* और मरती हुई इन्सानियत को ज़िन्दा रखने की अपील की गई। इस उपवास में शहर मुरादाबाद की कई अन्य सामाजिक संस्थाओं ने सहयोग एवं समर्थन किया, जिनमें *सर्वधर्म सेवा संगठन, चाइल्ड लाइन (SAARD) IFTM यूनिवर्सिटी, सामाजिक समरसता मंच, गंगा प्रदूषण समिति, बेटी का घर, संस्कृति जान कल्याण समिति, आदि संस्थाएं शामिल रहीं*।
इस अवसर पर इन संस्थाओं के एवं शहर मुरादाबाद के ये सभी सम्मानित लोग मौजूद रहे - राशिद सैफ़ी, कपिल सिंह, अनुज अग्रवाल, संत रामदास, नदीम मुक़म्मली, रिज़वान-उल-हक़, श्रद्धा शर्मा, डॉ अलका शर्मा, डॉ नीलम कुमारी, डॉ मुकेश दिवाकर, नीना उपाध्याय, रिज़वान हुसैन, आसिफ हुसैन, शहज़ाद खां, मो0 शमीम, रवींद्रनाथ भाटिया, जावेद सैफ़ी, नीतू सक्सेना, नसीम मलिक, प्रदीप कश्यप, गौतम सिंह, मनीष सिंह, आशीष यादव, फ़िरोज़, तनवीर फ़ात्मा आदि लोग मौजूद रहे।।

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