Friday, June 30, 2017

इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी का ईद मिलन समारोह



"आज दिनांक 27/06/17 को इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी की तरफ़ से कांठ रोड स्थित हिमगिरि कालोनी में ईद मिलन समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें शहर मुरादाबाद के तमाम वरिष्ठ एवं सम्मानित हर धर्म, हर वर्ग, हर जाति के लोग उपस्थित रहे। सोसाइटी के संस्थापक एवं अध्यक्ष राशिद सैफ़ी ने इस सम्बंध में बताया कि प्यार और मुहब्बत, अमन और  भाईचारे के इस मीठे त्यौहार "ईद" के उपलक्ष्य में आज सोसाइटी की तरफ़ से ये "ईद मिलन समारोह" आयोजित किया गया है। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ समाजसेवी सरदार गुरविन्दर सिंह, एवं पादरी पॉल सारस्वत रहे। इस अवसर पर सभी वक्ताओं ने  बोलते हुए कहा कि जिस तरह आज यहाँ ईद के शुभ अवसर पर एकता, भाईचारे, अमन और शान्ति का पैग़ाम दिया जा रहा है, उसी तरह के पैग़ाम पूरे देश मे देने की ज़रूरत है, हम सभी धर्मों, सभी वर्गों के लोगों को मिल-जुलकर एकता और भाईचारे का पैग़ाम पूरे देश मे फैलाना होगा, और इस देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब को क़ायम रखते हुए सारी दुनिया को ये संदेश देना होगा कि भारत एक महान देश है, और इन्सानियत यहाँ का सबसे बड़ा धर्म और मज़हब है। 

इस मौके पर बहुत बड़ी संख्या में ये सभी लोग उपस्थित रहे। -- 
सोसाइटी के अध्यक्ष राशिद सैफ़ी, डॉ इरशाद हुसैन, सरदार गुरविन्दर सिंह, पादरी पॉल सारस्वत, पादरी डेनियल मसीह, अनुज अग्रवाल, गौतम सिंह, मनीष कुमार, रवीन्द्रनाथ भाटिया, शारिक सैफ़ी, पप्पू भाई, मीना भारद्वाज, हाजी सदाक़त हुसैन, अशरफ़ अली, जमशेद खान, माजिद खान, मोहम्मद फहीम, अजीत भाई, हारून, संजय भारद्वाज, मोहम्मद फ़ैज़, मोहम्मद शादान आदि उपस्थित रहे।।

हमारे बाद भी रहे हमारे कर्मों की याद

"कहा जाता है कि ज़िन्दगी के "कुछ लम्हों" को "यादगार" बनाना तो सभी चाहते हैं, लेकिन ज़्यादातर लोग अक्सर यही सोचकर "निराश" हो जाते हैं कि ऐसा कोई "बड़ा काम" करना उनके बस की बात नहीं, और वे अपनी ज़िन्दगी के लम्हों को यादगार नहीं बना पाते, और "गुमनामी" के "अंधेरों" में ही जीवन "गुज़ार" देते हैं।
"दरअसल, हमारे दुनिया से जाने के बाद हमारी यादगार कैसी हो, इसे लेकर लोग अक़्सर "ग़फ़लत" में ही रहते हैं, यह तो "मुमकिन" नहीं कि सभी लोग "ऐतिहासिक शख़्सियत" बनने की "क्षमता" या "कुव्वत" रखते हों, फिर ऐसा क्या किया जाये जिससे हमारे जाने के बाद भी हमारे द्वारा किये गए कामों की "याद" बाक़ी रहे ?
"असल में, ज़िन्दगी में किसी ने "बड़ा काम" किया या "छोटा", इसकी कोई "अहमियत" नहीं होती, अहमियत इस बात की होती है कि आपने अपने "हाथों" से अपनी "आत्मा" की आवाज़ पर कुछ ऐसा काम किया जो पहले नहीं था, यह सचमुच "सोचने वाली" बात है कि जो बरसों पहले हमारे आस-पास "पीपल, "बरगद, जैसे पेड़ लगा गये क्या उनका "योगदान" अखबारों की "सुर्खियों" में रहने वालों से कम है ? कुछ करके दिखाने का मतलब यह नही कि हमे "पद-प्रतिष्ठा", और "पैसे" कमाने पर खरा माना जाये, बल्कि कुछ करके दिखाने का "असल मतलब" यह है कि हमारा किया हुआ कोई काम "दिल" को "छूता" हो, और हमारे जाने के "बाद" भी लोगों के दिलों को "छूता" रहे। अक़्सर लोग अपने "छोटे-छोटे कामों" के द्वारा भी लोगों के दिलों में जगह बना लेते हैं, और हमेशा बनाये रहते हैं।
"तो दोस्तों, अपने जीवन में "छोटे-बड़े" की परवाह किये बग़ैर कुछ ना कुछ ऐसे काम करें, जिनसे आपके इस "दुनिया" से जाने के "बाद" भी आपके द्वारा किये गए कामों की वजह से आप लोगों के "दिलों" में "ज़िन्दा" रहें। क्योंकि यही जीवन है, और यही इन्सानियत है।  (शुक्रिया)
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(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

औरत कहाँ सुरक्षित ??

"दोस्तों, आज हमारे समाज मे औरतों के ऊपर हो रहे "अत्याचारों, "बलात्कार, "छेड़छाड़, "दहेज हत्या, "शोषण, और "घरेलू हिंसा आदि को देखते हुए हमारी "सरकारें, "पुलिस व हमारे "सामाजिक संगठन" औरतों के "हक़, "न्याय, और "सुरक्षा" की बात तो करते हैं, लेकिन ये नही बताते हैं कि औरत आज आख़िर "सुरक्षित" है कहाँ ?? 
"क्या औरत "घर मे सुरक्षित है ? क्या औरत "खेत" मे सुरक्षित है ? क्या औरत "थानों" में सुरक्षित है ? क्या औरत "स्कूल-कॉलेजों" में सुरक्षित है ? क्या औरत "अस्पताल" में सुरक्षित है ? नहीं बिल्कुल नहीं !! 
इनमें से सभी जगहों पर वह बार-बार "हमलों" और "शोषण" का शिकार हुई है। 
"दरअसल, औरत जब भी किसी हमले, किसी शोषण का शिकार हुई, तब हमने औरत की सुरक्षा(Safety) को लेकर "कड़े कानून", "जल्द न्याय", और उसके लियें "संसाधनों" की बहुत बातें कीं, लेकिन इसके बावजूद अगर देखें तो औरत को सबसे ज़्यादा "असुरक्षित" पाया, अदालतें थक चुकी हैं, नेताओं की जुबानें भी थक गयी हैं और कभी-कभी बहक भी जाती हैं, औरतों के लियें न्याय और सुरक्षा मांगने वाले व "जुलूस" निकालने वाले सामाजिक संगठन भी थक चुके हैं, लेकिन औरत के लियें एक "सुरक्षित स्थान" अभी तक तय नहीं कर पाए हैं। औरत असुरक्षित "क्यों" है, इसके "बुनियादी कारणों को "टटोला" जाना चाहिए, 
"असल में, औरतों पर हमले की "शुरुआत हमारी "भाषा" से ही हो जाती है, आज हमारी भाषा में औरतों पर "गालियों" के "हमले" एक आम बात मानी जाती है, हम बातों ही बातों में औरतों पर गालियों के ज़ुबानी हमले करते रहते हैं, और ये हमले हमें "रूटीन" लगने लगे हैं। और इन्हीं भाषाई हमलों के साथ औरतों को लेकर हमारी "सोच" भी बेहद "निम्न स्तर" की हो चुकी है, जिसमें हम औरत को केवल "भोग की वस्तु" समझते हैं, और उसे केवल "वासना की दृष्टि" से देखते हैं जबकि वह हमारी "जननी" है, अगर वो ना होती तो हम भी "ना होते"।
"दरअसल, आज अगर औरत को हमे "सम्मान" व "न्याय" देना है तो सबसे पहले अपनी "भाषा" मे उसे "सम्मान" दें, और इसके साथ ही साथ हम अपनी "सोच" में "बदलाव" करके औरत को "सम्मान व "न्याय देने के अपने "इरादों" पर "मुहर" लगायें, तब ही औरत "घर से लेकर "बाहर तक "सुरक्षित" रहेगी, अन्यथा अगर हम ऐसा नही कर पाते हैं तो हमारे लियें "औरतों" की "सुरक्षा" की बात करना "बेमानी" ही है।        (धन्यवाद)
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(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

इन्सानियत का शपथ पत्र

दोस्तों, जैसा कि आप सभी जानते हैं कि इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी द्वारा किये जा रहे कार्यों, और उनको करने का "एकमात्र मक़सद" बस यही है कि समाज में "इन्सानियत" ज़िन्दा रहे, व हम सभी इन्सान सही मायनों में इन्सानियत से "जीना" सीख जायें, और इसी के साथ ही समाज में एक अच्छा "सन्देश" भी जाये, और लोग "नेक, और "भले कामों से "प्रेरणा" लेकर भलाई के काम करें। सोसाइटी द्वारा किये जा रहे इसी तरह के कामों की "कड़ी" में आज एक कड़ी और "जोड़ना" चाहता हूँ, जिस कड़ी का नाम है- इन्सानियत का शपथ पत्र इसमें हम सोसाइटी की ओर से एक "शपथ पत्र" तैयार कर रहे हैं, जिसमें हम अपने "समाज, अपने "देश, अपने "राज्य, अपने "शहर, व अपने "गली-मोहल्लों" की "भलाई, "विकास, और "तरक़्क़ी से सम्बंधित कुछ "बिन्दुओं" पर ये शपथ पत्र तैयार करेंगे, व "नुक्कड़ सभाओं" द्वारा, एवं "घर-घर जाकर ये शपथ पत्र हम लोगों को "वितरित" करेंगे, इस शपथ पत्र में कई तरह के बिंदु जैसे - देश एवं समाज हित में "बिजली बचाना", अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिये "पानी बचाना", सरकारी "संपत्तियों एवं "संपदाओं को "नुकसान ना पहुँचाना, "सामाजिक बुराइयों" के ख़िलाफ़ लोगों को जागरूक करना, ग़रीब, मजबूर, असहाय, दीन-दुखियों की मदद करके "इन्सानियत की मिसाल" पेश करना आदि कुछ "महत्वपूर्ण बिंदु" तैयार किये जायेंगे, व सोसाइटी की तरफ़ से लोगों में ये शपथ-पत्र बाँट कर उन्हें "शपथ" दिलायी जायेगी कि वे "देश हित" में "समाज हित" में इन सब भलाई के कार्यों को करने की कोशिश करें, व दूसरों को भी अच्छे काम करने को "प्रेरित" करें, और साथ ही साथ समाज में जो कोई "अच्छा काम" कर रहा है उसका वह अच्छा काम ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाए जिससे दूसरे भी "प्रेरणा" लेकर "नेकी" और "भलाई" के काम कर सकें।
दोस्तों, बहुत जल्द ये शपथ पत्र तैयार हो जायेगा, और इसे लेकर हम "आपके दरवाज़े" पर इस "आशा" के साथ आयेंगे कि "इन्सानियत के नाते", और इन्सानियत को ज़िन्दा रखने हेतु इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी को आपका अमूल्य सहयोग अवश्य मिलेगा।। (धन्यवाद)
(हमारी इस "मुहिम" में जो लोग भी सोसाइटी से "जुड़कर" "समाजसेवा" और "इन्सानियत" के काम करना चाहते हैं, उनका हार्दिक स्वागत है, वे सोसाइटी की "सदस्यता" ले सकते हैं, सदस्यता "पूर्णतया निःशुल्क" है,)
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"राशिद सैफ़ी" मुरादाबाद
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

आज मुल्क़ में इन्सानियत रो रही है

"आज "मुल्क़" में "इन्सानियत" "रो" रही है, 
"ज़िन्दादिली" और "एकता" शायद कहीं "सो" रही है,

"प्यार" और "मुहब्बत" की बातें सिर्फ "किताबों" में ही रह गयीं, 
"आज "हर मोड़" पर "निहायत बेशर्मी" हो रही है,

"इन्सान" की "संवेदनाएं" बन गयी हैं "तमाशा",
"इन्सानियत" की "भावनाएं" भी कहीं "खो" रही हैं,

"प्यासे" को "पानी" क्या "पिलायेगा" कोई, 
"प्यास" तो "चौखट" पर ही "दम" तोड़ रही है,

"कोई नहीं करता "मदद" यहाँ "किसी" की,
"खुदगर्ज़ी" की "बारिश" ही हमें "भिगो" रही है,

"दिल" को हमने अपने "सामान" बना डाला है,
"बाज़ार" में बस इसकी ही "ख़रीदारी" हो रही है,

"दुःख" और "दर्द" अब हमारे अन्दर कहाँ, ?
"इन्सान" होने की "पहचान" शायद कहीं "खो" रही है,  

"मंज़िलों" के "रास्ते" ख़ुद हमने ही "बंद" कर डाले, 
"अब इनको "खोलने" में "परेशानी" क्यूँ हो रही है,?

"प्यार" और "मुहब्बत" की "डोर" ख़ुद ही "तोड़ते" जा रहे हैं हम, 
"और फिर कहते हैं, ये "डोर" "कमजोर" क्यूँ हो रही है,

"यह सारे "सवाल" ख़ुद हमने ही "खड़े" किये हैं, 
"तो अब "जबाब" देने में "परेशानी" क्यूँ हो रही है ?

"तो अब जबाब देने में परेशानी क्यूँ........????
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(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

"इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी" ने किया पर्वतारोही रवि के "माता-पिता" एवं "गुरु" गुरविन्दर सिंह का "सम्मान"


"आज दिनांक 08/06/17 को इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी ने मुरादाबाद और देश की शान पर्वतारोही रवि कुमार के माता-पिता एवं गुरु सरीखे सरदार गुरविन्दर सिंह का सम्मान किया। इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी के सभी सदस्य आज शाम 6 बजे पर्वतारोही रवि के भोला सिंह की मिलक स्थित घर पर पहुँचे एवं रवि के माता-पिता और गुरु सरीखे सरदार गुरविन्दर सिंह का सोसाइटी की तरफ़ से फूल मालायें पहना कर एवं शॉल ओढ़ा कर सम्मानित किया। इस सम्बन्ध में बताते हुए सोसाइटी संस्थापक एवं अध्यक्ष राशिद सैफ़ी ने बताया कि रवि जैसी महान आत्मा को जन्म देने वाले माता-पिता तो धन्य हैं ही, साथ ही साथ महानता की उसी श्रेणी में रवि को मार्गदर्शन देने वाले, एवं जीवन में आगे बढ़ने के लियें उत्साहवर्धन करने वाले, उनके गुरु सरीखे गुरविन्दर सिंह भी सम्मान के हक़दार हैं। क्योंकि गुरु हमें दुनिया में "जीने का सलीका, और जीवन में आगे बढ़ने की "प्रेरणा, एवं दुनिया में अपने माता-पिता, और देश का नाम "रौशन करने की शिक्षा एवं प्रेरणा देते हैं। इसीलिए आज इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी के द्वारा रवि के "माता-पिता" एवं "गुरु सरीखे" सरदार गुरविन्दर सिंह दोनों का ही सम्मान किया गया।
इस मौके पर सोसाइटी के सभी सदस्य, रवि के परिवारजन, एवं भारी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
अध्यक्ष राशिद सैफ़ी, विनय विशनोई, डॉ इरशाद सैफ़ी, सरदार गुरविन्दर सिंह, शालिनी वर्मा, रविंद्रनाथ भाटिया, अनुज अग्रवाल, वसीम अहमद, नीरू रानी, मनोज, गौरव, आदि उपस्थित रहे।।

देश के "गौरव" पर्वतारोही "रवि कुमार" को "मार्मिक श्रद्धांजलि"







"दोस्तों, कहा जाता है कि "आसमान" "छूने" की "तमन्ना" तो हर इंसान को रहती है, मगर उसे छु कोई-कोई ही पाता है, और वही छूता है, जिसके अन्दर "हौसला" हो, कुछ कर गुज़रने की तमन्ना हो, "इतिहास" रचने का "जज़्बा" हो, इसी तरह के कुछ इन्सानों में से एक "महान आत्मा" मुरादाबाद और देश का "गौरव" "पर्वतारोही रवि कुमार" थे, थे इसलियें लिख रहा हूँ क्योंकि आज सारी "उम्मीदों" और "आशाओं" पर विराम लग चुका है, और देश का नाम पूरे "विश्व" में "रौशन" करने वाले देश के गौरव पर्वतारोही रवि कुमार का "शव" आज रात करीब 8 बजे मुरादाबाद पहुँचेगा, रवि कुमार अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप, एशिया, और अब "माउंट एवरेस्ट" सहित दस देशों की चोटियों पर "फ़तह" हासिल करके हमारे देश का "तिरंगा" फ़हरा चुके हैं, और देश का नाम सारे विश्व में रौशन कर चुके हैं, मगर हमारी "बदक़िस्मती" है कि आज रवि कुमार हमारे बीच आ रहे हैं तो मृत अवस्था में, मगर हम ऐसी महान आत्मा को मृत नहीं मानते, रवि कुमार आज भी हमारे दिलों में "ज़िन्दा हैं, व हमेशा रहेंगे, 
रवि तुम्हें सलाम !!!
आज हम इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी की ओर से बेहद "दुःखी" होकर पर्वतारोही रवि कुमार को बेहद "मार्मिक श्रद्धांजलि" दे रहे हैं। ईश्वर आपकी आत्मा को "शांति" दें।। (आमीन)
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(राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

मुरादाबाद एवं देश के गौरव पर्वतारोही रवि कुमार की गुमशुदगी को लेकर प्रधानमन्त्री को पत्र

जैसा कि सबको विदित है कि मुरादाबाद शहर के रहने वाले "रवि कुमार" देश का "गौरव" बढ़ाने वाले एक "साहसी पर्वतारोही" हैं, जिन्होंने दुनिया की कई "पहाड़ी चोटियों" को फ़तह करके अपने देश का "तिरंगा झंडा" वहाँ फ़हराया है, और हमारे देश का नाम "रौशन" किया है। इसी कड़ी में पर्वतारोही रवि कुमार ने शनिवार को दुनिया की सबसे ऊँची चोटी "माउंट एवरेस्ट" को फ़तह कर लिया और अपने देश का तिरंगा झंडा माउंट एवरेस्ट पर फ़हरा कर हमारे देश का "गौरव" और "मान-सम्मान" बढ़ाया, ये हम सभी मुरदाबाद वासियों एवं देशवासियों के लियें बड़ी "ख़ुशी" और "गर्व" की बात है। लेकिन इसी के साथ-साथ बड़े "दुःख" और "पीड़ा" का विषय ये है कि उसी दिन से पर्वतारोही रवि कुमार का पता नहीं चल रहा है, नेपाल सरकार ने तो कल उनकी "मौत" की पुष्टि भी कर दी है, जिसमे उन्हें माउंट एवरेस्ट चोटी से लौटते हुए गिरने से मौत होना दर्शाया गया है, इस दुःखद समाचार से मुरादाबाद शहर ही नहीं पूरा देश एवं रवि कुमार का परिवार भी बेहद "सदमे" में है, और इस ख़बर पर किसी को भी "विश्वास" नहीं हो रहा है, क्योंकि अभी तक पर्वतारोही रवि कुमार का "शव" भी नहीं मिला है, रवि कुमार से मेरी पहचान एक अच्छे दोस्त और भाई की तरह थी, मुरादाबाद के "वरिष्ठ समाजसेवी" आदरणीय "सरदार गुरविन्दर जी" के साथ ना जाने कितने "समाजसेवा" के "कार्यक्रमों" में हमने और रवि कुमार ने एक साथ अपनी "सेवायें" दी हैं, लेकिन आज उनके इस तरह से माउंट एवरेस्ट की चोटी से गायब होने की घटना से मन बहुत "दुःखी" है। मुझे एवं मुरादाबाद शहर के एक-एक व्यक्ति, उनके परिवार, और देश के सभी लोगों को ये पूर्ण "विश्वास" और "आशा" है कि पर्वतारोही रवि कुमार "ज़िन्दा" हैं और "सही-सलामत" हैं, और इसी विश्वास और आशा के साथ हम सब अपने-अपने "ख़ुदा" और "ईश्वर", से "प्रार्थना" करते हैं कि देश का गौरव रवि कुमार जल्द से जल्द "सकुशल, "सही-सलामत वापस लौट आये। और साथ ही हम अपनी सोसाइटी, इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी की तरफ़ से देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी से ये "अपील" और "निवेदन" करते हैं कि जल्द से जल्द पर्वतारोही रवि कुमार की "तलाश" और "खोज" करायी जाये, जिस तरीके से भी संभव हो उन्हें खोजकर वापस लाया जाये, एवं हमारे देश का मान-सम्मान और गौरव बढ़ाने वाले इस साहसी पर्वतारोही रवि कुमार के परिवारवालों, मुरादाबाद शहर के लोगों और देश की सारी जनता की "आँखों" में खुशियों के "दीप" जलायें। 
             (धन्यवाद)
"निवेदक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद"
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी