Thursday, April 6, 2017

दुनिया को बुरा हमने ही बनाया दोस्तों



"दुनिया" को "बुरा" "हमने" ही बनाया दोस्तों,
"आईना" हमेशा "दूसरों" को ही दिखाया दोस्तों,

"जाना था "मंजिल-ए-राह" में "मुद्दतों" से,
"लेकिन खुद "बैठे" और सबको साथ "बिठाया" दोस्तों,

"अपनी ही "बदनामियों" में "मुब्तिला" होकर,
"नाम" हमने भी ख़ूब "कमाया" दोस्तों,

"कल" की "ख़बर" नहीं किसी को यहाँ,
"शतरंजी चालें" आख़िर क्यों है "जमाया" दोस्तों,

"हम" में तो ना "दिल" है ना ही "जान" है "राशिद",
"अपनी" ही "लाश" को "कब" से "सजाया" दोस्तों,

"दुनिया को बुरा हमने...........
~~~~~
(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

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