Thursday, April 6, 2017

कामयाबी का शॉर्टकट



"कहा जाता है कि ज़िन्दगी में "पैसा, "शोहरत, और "ताक़त, "हासिल" करने से कई गुना "मुश्किल है अपनी "अच्छाइयों" को बनाये रखना, और दूसरों की भलाई के लियें काम करना।
"दरअसल, काम अच्छा हो, और उसे करने का "तरीका" भी अच्छा हो यह ज़रूरी नहीं, हम इन्सान अक्सर "सफल" या "कामयाब" होने के चक्कर में कई बार "शॉर्टकट" ही नहीं, कई ऐसे "रास्ते" भी अपना लेते हैं जो सामाजिक, या नैतिकता, किसी भी पैमाने पर "फिट" नहीं बैठते। कामयाब होने के चक्कर में हम अक़्सर बहुत कुछ "भूल" जाते हैं। 
"असल में, आज एक आम व्यक्ति के लियें बेहतर ज़िन्दगी जीने के लियें "आर्थिक, "आत्मनिर्भरता, "ताक़त, "शोहरत, और "प्रतिष्ठा, ये सभी चीज़ें जो उसके पास नहीं होतीं, और दूसरे के पास होती हैं, उसे ये मानने पर "मजबूर" करती हैं, कि दूसरा व्यक्ति "सफल" है, कामयाब है, और यही सफलता एक "परदे" का काम भी करती है, जो दूसरे व्यक्ति की "बुराइयाँ" भी इसी परदे में "छिपा" लेती है।
"दरअसल, आज हम इन्सानों की "सोच" और "मानसिकता" इस तरह की हो चुकी है कि हमें "आनन-फानन" में सफलता चाहिये, चाहे उसके लिये हमें कोई शॉर्टकट रास्ता अपनाना पड़े, या कोई अनैतिक काम करना पड़े, हम सफलता पाने के चक्कर में सबकुछ कर गुज़रते हैं। लेकिन सफ़लता पाने का मतलब महज़ दौलत, शोहरत, और ताक़त, हासिल करना ही नहीं है, वरन अपने-आप से ज़्यादा दूसरों की भलाई के बारे में सोचना, लोगों के भले के लियें कार्य करना, और दूसरों के दुःख-दर्द समझकर उन्हें दूर करने के "प्रयास" करना ही "असली सफलता" है, क्योंकि हमारी जेब में अगर "हज़ारों रुपया" हो, लेकिन अगर हम किसी "नेत्रहीन" या "कमज़ोर" को सड़क पार कराने को दो बार "सोचें", तो हमारे वे सारे रूपए बेकार हैं, हमारी दौलत शोहरत किसी काम की नहीं, हमें यह चाहिये कि जब भी हम कोई काम करें, तो इस बात को ध्यान में रखकर करें, कि हमारे उस "काम" में हम जो भी कुछ "अच्छा" या "बुरा" कर रहे हैं वह "देर-सवेर" हमारी ही तरफ़ पलटकर "वापस" ज़रूर आयेगा। एक कहावत इसी बात को चरितार्थ भी करती है- करता था तो क्यों रहा, अब काहे पछताय, बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहाँ से होय
"तो दोस्तों, हमें और आपको चाहिये कि सफलता या कामयाबी पाने के चक्कर किसी शॉर्टकट, या अनैतिक काम में "लिप्त" ना हो जायें, और सफलता का पैमाना सिर्फ़ दौलत, शोहरत, और ताक़त, को ही मानें, बल्कि अपने दिल में दूसरों के लियें "प्यार, "दया, और "हमदर्दी, रखते हुये ईश्वर के बनाये हुए सभी "प्राणियों" की भलाई के लिये कार्य करने की "कोशिश" करें, तभी हम सच्चे मायनों में सफल हो पायेंगे।।                  
              (शुक्रिया)
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(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

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