Wednesday, April 26, 2017

छत्तीसगढ़ के सुकमा में शहीद जवानों को श्रद्धांजलि








"आज दिनांक 25/04/2017 को इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी की ओर से एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन कम्पनी बाग़ के गांधी पार्क स्थित शहीद स्मारक पर किया गया, जिसमे कल छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों/आतंकवादियों द्वारा किये गये हमले में शहीद हुए हमारे 26 जवानों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी गयी, एवं दो मिनट का मौन रखकर मरने वाले शहीदों की आत्मा की शान्ति के लियें प्रार्थना की गयी, साथ ही इस हमले में गंभीर रूप से घायल दूसरे कई जवानों, शेर मोहम्मद आदि के जल्द से जल्द स्वस्थ होने के लियें दुआ की गयी।।
इस बारे में बोलते हुए *इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी* के अध्यक्ष *राशिद सैफ़ी* ने बताया कि नक्सलवाद और आतंकवाद दोनों ही हमारे देश के लियें एक अभिशाप है जिसके तहत हमारे ना जाने कितने बेगुनाह जवान हर साल अपनी शहादत देते हैं, आज से सात साल पहले भी छत्तीसगढ़ के इसी सुकमा में नक्सलियों ने हमारे 76 जवान शहीद कर दिए थे, और इसी तरह के हमलों में हर साल हमारे सैंकड़ों जवान और बेगुनाह लोग शहीद हो जाते हैं, और कल भी इसी तरह के हमले में हमारे सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद हुए हैं। ये एक इन्सानियत को शर्मसार करने वाला कृत्य है, इन्सानियत किसी भी इंसान को किसी दूसरे इंसान की जान लेने की इजाज़त बिल्कुल नहीं देती, *इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी* इन्सानियत को शर्मसार करने वाले इस कृत्य की कड़े शब्दों में घोर निंदा, एवं भर्त्सना करती है, एवं मरने वाले शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना और दुःख व्यक्त करती है, और उनके साथ खड़ी है। और साथ इस हमले में गंभीर रूप से घायल सभी जवानों ख़ास तौर पर शेर मोहम्मद जैसे जवान, जिन्होंने अपनी जान पर खेल कर नक्सलियों से जमकर टक्कर ली, और ख़ुद घायल होते हुए भी अपने कई साथियों को कंधे पर उठाकर उनकी जान बचाई, "इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी" शेर मोहम्मद की बहादुरी को सलाम करते हुए सभी घायल जवानों के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की कामना करती है, और मरने वाले जवानों की आत्मा की शान्ति के लियें दुआ करती है।।
इस मौके पर मुख्य रूप से सोसाइटी के सभी कार्यकर्ता एवं काफी संख्या में शहर के वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। -
अध्यक्ष राशिद सैफ़ी, डॉ. इरशाद सैफ़ी, सरदार गुरविंदर सिंह, मीना भारद्वाज, फ़रीद अहमद, शारिक सैफ़ी, सदाकत हुसैन, रिज़वान, आकिल, डॉ. वसीम, नीरू कुमारी, लवकुश कंछल, मोहम्मद फ़ैज़, आदि उपस्थित रहे।।

Thursday, April 13, 2017

भारतीय पूर्व नोसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव की फाँसी रोकने को पाकिस्तानी उच्चायुक्त के नाम ज्ञापन









"आज दिनाँक 13/04/17 को इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी की तरफ़ से मुरादाबाद के जिलाधिकारी महोदय ज़ुहैर बिन सग़ीर के माध्यम से एक ज्ञापन, पाकिस्तान के उच्चायुक्त महोदय अब्दुल बासित के नाम दिया गया, जिसमें पाकिस्तानी सैन्य कोर्ट द्वारा भारतीय नोसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को इन्सानियत के नाते फाँसी ना देने का विनम्र निवेदन किया गया। इस सम्बन्ध में बताते हुए इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी के संस्थापक/अध्यक्ष राशिद सैफ़ी ने बताया कि हम अपनी सोसाइटी की ओर से मानवता के नाते ये ज्ञापन देकर पाकिस्तानी सरकार से विनम्र अनुरोध कर रहे हैं कि बिना किसी सबूत, बिना किसी सरकारी मदद दिये, बिना कोई आरोप साबित हुए भारत के पूर्व नोसेना अधिकारी को फाँसी देना, पूरी मानव जाति को फाँसी देने जैसा है, एवं इन्सानियत की हत्या है, और मानव अधिकारों का हनन है। क्योंकि जब कोई इंसान फाँसी के फंदे पर झूलता है तो सिर्फ वो अकेला ही फाँसी नही चढ़ता है, बल्कि उसके साथ कई और ज़िंदगियाँ भी फाँसी चढ़ती हैं, उसके माँ-बाप, उसके भाई-बहन, उसकी पत्नी, उसके बच्चे, आदि, और फाँसी के सम्बन्ध में इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी के ये मानना है कि फाँसी की सज़ा पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध होना चाहिये, दुनिया के किसी भी देश मे फाँसी देने का प्रावधान नही होना चाहिये, क्योंकि अगर हम किसी को ज़िन्दगी दे नही सकते, तो हमे किसी की ज़िन्दगी लेने का भी कोई अधिकार नही है। इसीलिए हम सोसाइटी की तरफ़ से पूरी दुनिया के देशों से ये मांग करते हैं कि फाँसी को पूरी तरह से बंद किया जाये, और उसकी जगह आरोप साबित होने पर उम्र क़ैद या आजीवन कारावास की सज़ाएं दी जाएं।।
ज्ञापन देने के इस मौके पर ये सभी लोग मौजूद रहे - सोसाइटी के अध्यक्ष राशिद सैफ़ी, सचिव डॉ इरशाद सैफ़ी, फ़रीद अहमद, विनय विशनोई, वरिष्ठ समाजसेवी अशोक शर्मा जी आदि उपस्थित रहे।।

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"राशिद  सैफ़ी "आप" मुरादाबाद"
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

Thursday, April 6, 2017

कामयाबी का शॉर्टकट



"कहा जाता है कि ज़िन्दगी में "पैसा, "शोहरत, और "ताक़त, "हासिल" करने से कई गुना "मुश्किल है अपनी "अच्छाइयों" को बनाये रखना, और दूसरों की भलाई के लियें काम करना।
"दरअसल, काम अच्छा हो, और उसे करने का "तरीका" भी अच्छा हो यह ज़रूरी नहीं, हम इन्सान अक्सर "सफल" या "कामयाब" होने के चक्कर में कई बार "शॉर्टकट" ही नहीं, कई ऐसे "रास्ते" भी अपना लेते हैं जो सामाजिक, या नैतिकता, किसी भी पैमाने पर "फिट" नहीं बैठते। कामयाब होने के चक्कर में हम अक़्सर बहुत कुछ "भूल" जाते हैं। 
"असल में, आज एक आम व्यक्ति के लियें बेहतर ज़िन्दगी जीने के लियें "आर्थिक, "आत्मनिर्भरता, "ताक़त, "शोहरत, और "प्रतिष्ठा, ये सभी चीज़ें जो उसके पास नहीं होतीं, और दूसरे के पास होती हैं, उसे ये मानने पर "मजबूर" करती हैं, कि दूसरा व्यक्ति "सफल" है, कामयाब है, और यही सफलता एक "परदे" का काम भी करती है, जो दूसरे व्यक्ति की "बुराइयाँ" भी इसी परदे में "छिपा" लेती है।
"दरअसल, आज हम इन्सानों की "सोच" और "मानसिकता" इस तरह की हो चुकी है कि हमें "आनन-फानन" में सफलता चाहिये, चाहे उसके लिये हमें कोई शॉर्टकट रास्ता अपनाना पड़े, या कोई अनैतिक काम करना पड़े, हम सफलता पाने के चक्कर में सबकुछ कर गुज़रते हैं। लेकिन सफ़लता पाने का मतलब महज़ दौलत, शोहरत, और ताक़त, हासिल करना ही नहीं है, वरन अपने-आप से ज़्यादा दूसरों की भलाई के बारे में सोचना, लोगों के भले के लियें कार्य करना, और दूसरों के दुःख-दर्द समझकर उन्हें दूर करने के "प्रयास" करना ही "असली सफलता" है, क्योंकि हमारी जेब में अगर "हज़ारों रुपया" हो, लेकिन अगर हम किसी "नेत्रहीन" या "कमज़ोर" को सड़क पार कराने को दो बार "सोचें", तो हमारे वे सारे रूपए बेकार हैं, हमारी दौलत शोहरत किसी काम की नहीं, हमें यह चाहिये कि जब भी हम कोई काम करें, तो इस बात को ध्यान में रखकर करें, कि हमारे उस "काम" में हम जो भी कुछ "अच्छा" या "बुरा" कर रहे हैं वह "देर-सवेर" हमारी ही तरफ़ पलटकर "वापस" ज़रूर आयेगा। एक कहावत इसी बात को चरितार्थ भी करती है- करता था तो क्यों रहा, अब काहे पछताय, बोया पेड़ बबूल का, तो आम कहाँ से होय
"तो दोस्तों, हमें और आपको चाहिये कि सफलता या कामयाबी पाने के चक्कर किसी शॉर्टकट, या अनैतिक काम में "लिप्त" ना हो जायें, और सफलता का पैमाना सिर्फ़ दौलत, शोहरत, और ताक़त, को ही मानें, बल्कि अपने दिल में दूसरों के लियें "प्यार, "दया, और "हमदर्दी, रखते हुये ईश्वर के बनाये हुए सभी "प्राणियों" की भलाई के लिये कार्य करने की "कोशिश" करें, तभी हम सच्चे मायनों में सफल हो पायेंगे।।                  
              (शुक्रिया)
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(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

इन्सान हमेशा से गंदा ना था



"इन्सान" हमेशा से "गंदा" ना था,
"साथ में लाया "लालच" का ये "फंदा" ना था,

"सियासतों" में "मज़हबों" का 
ये "धंधा",
किसी "दौर" में भी "मंदा" ना था,

"लोग "बेबजह" ही "हैरान" "परेशान" होते हैं,
"इन्सान ये "हमेशा" के लियें "ज़िन्दा" ना था,

"महफ़िल" से "उठकर" चल दिये थे क्यूँ "लोग",
"यूँ तो किसी ने "मांगा" "चंदा" ना था,

"दुनिया की "शतरंज" क्या जाने राशिद,
पागल था, दीवाना था, पर ख़ुदा का नेक बंदा ना था,  

"इन्सान" हमेशा से..............
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(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

दुनिया को बुरा हमने ही बनाया दोस्तों



"दुनिया" को "बुरा" "हमने" ही बनाया दोस्तों,
"आईना" हमेशा "दूसरों" को ही दिखाया दोस्तों,

"जाना था "मंजिल-ए-राह" में "मुद्दतों" से,
"लेकिन खुद "बैठे" और सबको साथ "बिठाया" दोस्तों,

"अपनी ही "बदनामियों" में "मुब्तिला" होकर,
"नाम" हमने भी ख़ूब "कमाया" दोस्तों,

"कल" की "ख़बर" नहीं किसी को यहाँ,
"शतरंजी चालें" आख़िर क्यों है "जमाया" दोस्तों,

"हम" में तो ना "दिल" है ना ही "जान" है "राशिद",
"अपनी" ही "लाश" को "कब" से "सजाया" दोस्तों,

"दुनिया को बुरा हमने...........
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(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी

"धर्म" की कोई "दुकान" "खोल" लीजिये


"धर्म" की कोई "दुकान" खोल लीजिए,
"सियासत" के "सामान" भी "मोल" लीजिये,

"कामयाबी" के नए "पैमानों" में लोगों,
"थोड़े से "झूठे" मुस्कान "बोल" लीजिए,

"उस जहाँ" की "ख़रीदारी" से पहले दोस्तों,
"अपने यहाँ" के "मकान" "तोल" लीजिए,

"रौशनी" दिखाने वाले "दलालों" से यारों,
"पहले "जान" उनके "पोल" लीजिए,

"गाता" है "गीत" "सुधार" का एक "राशिद", 
"अब "आप" भी "ढोल" "तान" लीजिए,

"धर्म" की कोई "दुकान".........
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(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी