Wednesday, February 22, 2017

चेहरे की सुंदरता अच्छी, या मन की सुंदरता अच्छी



"कहा जाता है कि अगर हमारी "आँखें" चेहरे की जगह "आत्मा या मन की "सुंदरता" देख पातीं, तो ये दुनिया कुछ अलग होती। हमारे "रिश्ते" और "व्यवहार" सभी अलग होते, और सुंदरता की "परिभाषा(Definition) भी अलग होती।
"दरअसल, आज हमारे समाज में हर दिन "युवा लड़के" और ख़ास तौर पर "लड़कियाँ" सुंदरता के प्रति किये जाने वाले इस "भेदभाव" के शिकार होते हैं। अक्सर हम दूसरों के द्वारा अपने बहुत पतले, बहुत मोटे, दूसरों से लंबे, या बहुत ठिगने, या फिर काला या गोरा होने के "तानों" का शिकार होते हैं। दूसरों के द्वारा किये गये "तानाकशी" या Comments से कई तरह की "हीनभावनाएं" हमारे दिल में बैठ जाती हैं, जो हमारा पीछा नहीं छोड़तीं, और हम अपने आपको दूसरों से "तुच्छ" समझने लगते हैं, और ना चाहते हुए भी हम कई तरह के "दबाव" "झेलते" रहते हैं।
"असल में, हम समाज के द्वारा की गयी सुंदरता की परिभाषा को नहीं बदल सकते, लेकिन अपनी सोच, और अपने लियें सुंदरता की परिभाषा को अवश्य बदल सकते हैं। हम सुन्दर होने के लियें इसलियें बेचैन रहते हैं, क्योंकि हम मानते हैं कि हम सुन्दर नहीं हैं। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं, हमें सोचना यह चाहिए कि ईश्वर का बनाया हुआ हर व्यक्ति सुन्दर होता है, हर कोई अपने अन्दर कोई ना कोई "ख़ूबसूरती" लिए हुए होता है। किसी का "चेहरा सुन्दर होता है, किसी की "आवाज़ सुन्दर होती है, किसी का "व्यवहार सुन्दर होता है, किसी की "आँखें सुन्दर होती हैं, किसी के "बाल सुन्दर होते हैं, किसी की "नाक सुन्दर होती है, और कोई "गोरा होकर भी सुन्दर नहीं होता, तो कोई "काला" होकर भी बेहद "सुन्दर और "आकर्षित" लगता है।
"दरअसल, सुंदरता ईश्वर ने नहीं समाज ने तय की है, हमारे जीवन के लियें हमारा ये शरीर एक "सच" है, और हम इसे सबसे सुंदर मानकर प्यार करें, चेहरे के साथ-साथ विचारों की सुंदरता भी बेहद अहम् है, लोग चेहरे से "आकर्षित" तो होते हैं, लेकिन "प्यार" आपके "व्यवहार और "गुणों से करते हैं, इसलियें अपने चेहरे या शरीर के लिये ख़ुद को "कोसना" बंद करें, आप कैसे दिखते हैं, इसकी जगह आप क्या हैं, कहाँ "मज़बूत" हैं, और कौन सी "ख़ूबी" आपके अंदर है, इस रूप में ख़ुद की सुंदरता को परिभाषित करें।।
"तो दोस्तों, हमें और आपको चाहिये,(ख़ास तौर पर युवा लड़कियों को) कि अपने चेहरे, अपने शरीर, या अपने रंग को लेकर किसी भी तरह की हीन-भावना का शिकार ना हों, आप जैसे भी हैं बेहद सुन्दर हैं, और अपने अंदर मोटे, पतले, लंबे, ठिगने, या काला, या गोरा, होने का "ऐब" निकालने की बजाय, अपने "व्यवहार और "गुणों" को दूसरों के सामने लायें, और अपनी "आत्मा" और "मन" की "सुंदरता से सबका मन मोह लें।
(धन्यवाद)
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(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
*इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी*

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