Wednesday, February 22, 2017

जीवन की "कठिनाइयाँ" और इंसान की "बौखलाहट



"कहा जाता है कि ज़िन्दगी में अक्सर हम इन्सानों के सामने जब कोई "कठिनाई" या "परेशानी" आती है, तो ऐसी स्थिति में हम "बौखला" जाते हैं, और बिना सोचे-समझे कोई "ग़लत फैसला" कर बैठते हैं, जिससे हमें बजाय "फायदे" के "नुकसान" ही होता है।
"दरअसल, यह बात सही है कि हमारे जीवन में "लाखों कठिनाइयाँ" हैं, मगर इन कठिनाइयों से निकलने के "रास्ते" और "उपाय" भी कम नहीं। लेकिन ज़िन्दगी में जब कोई कठिनाई हमारे सामने आती है तो हम बौखला जाते हैं, और यही "बौखलाहट" हमारी "सोचने-समझने" की "ताक़त" को कम कर देती है, और ऐसे में हम कोई गलत फैसला ले बैठते हैं। जबकि ऐसी किसी भी "परिस्थिति" में होना यह चाहिए कि हम अपने दिमाग को "शांत" रखने की कोशिश करें, कठिनाई से "घबरायें" या "भागें" नहीं, और उन हालात के आगे "लड़खड़ाने की बजाय, धैर्य, सुकून, और "सहजता के साथ उस कठिनाई से "बाहर" निकलने का "रास्ता" तलाश करें।
"असल में, कठिनाई जितनी भी बड़ी हो, उसके आगे "मौन साधना" सीखें, बिना "हड़बड़ाये शांत होकर दिल और दिमाग को ठंडा करने से ही "आधी लड़ाई" उस कठिनाई से हम जीत सकते हैं। क्योंकि अगर हमारा "मन" और "मस्तिष्क" "शांत" और "स्थिर" नहीं होता, तो किसी भी कठिनाई की स्थिति में समस्या बजाय कम होने के "बढ़ती" ही है। अगर हमें बुरे हालात से सामना करना है तो "भावनात्मक रूप" से मज़बूत रहना होगा, और शांत रहकर "बुरे हालात" से छुटकारा पाना होगा।
"तो दोस्तों, हम सभी की ज़िन्दगी में "परेशानियां, "कठिनाइयां, "समस्याएं, तो आती ही हैं, लेकिन ऐसी "परिस्थिति" में हमें और आपको चाहिए कि बिना "घबराये, बिना "बौखलाये, "शांत मन" से अपनी परेशानी की वजहों, और उससे बाहर निकलने का "रास्ता" तलाश करें, और यक़ीन रखें ऐसा करने से बड़ी से बड़ी कठिनाई भी आसान हो जाती है (धन्यवाद)
~~~~~~~~~~~~~~~
(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)
संस्थापक/अध्यक्ष
*इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी*

0 comments:

Post a Comment