Sunday, February 26, 2017

जीवन एक रंगमंच है


"कहा जाता है कि हमारा जीवन एक "रंगमंच"(नाच, नाटक, खेल, करने की जगह) है। और हम सब इंसान इस "रंगमंच" पर "नाटक" करने वाले "कलाकार और "अभिनेता हैं। और इस रंगमंच को चलाने वाला, यानि इसका "डाइरेक्टर" वो ऊपर बैठा "हमारा ख़ुदा", "हमारा ईश्वर" है।
"दरअसल, हमारी ज़िन्दगी रंगमंच पर चलता हुआ एक "नाटक" ही तो है, हमें इस रंगमंच पर या इस दुनिया के नाटक में अभिनय(Acting) करने के लिये ही तो भेजा गया है। इसी अभिनय के तहत हम अपनी ज़िन्दगी में "रोते" भी हैं, "हँसते" भी हैं, "दुःखी" भी होते हैं, "खुश" भी होते हैं, "प्यार" भी करते हैं, "नफ़रत" भी करते हैं, किसी को "मारते" भी हैं, ख़ुद "मरते" भी हैं, "ख़लनायक" बनकर लोगों पर "ज़ुल्म" भी करते हैं, और "नायक" यानि "हीरो" बनकर लोगों की "मदद" भी करते हैं।। 
"असल में, "ख़ुदा ने हम सबको इस दुनिया के "रंगमंच" पर अपने "अभिनय" या Acting की बेहतर से बेहतर "Performence" देने के लिये भेजा है, और एक दिन आख़िर में जब इस जीवन के नाटक का "अंत" होगा तब हमारे अभिनय की Performence का "रिजल्ट" हमें पता चलेगा, कि हमें "जिस अभिनय" के लिये भेजा गया था वो हमने "कैसा" किया, क्योंकि उस ख़ुदा ने तो जीवन के इस रंगमंच पर भेजने के साथ-साथ इसमें अभिनय करने के लिये "स्क्रिप्ट"(क़ुरान, गीता, बाइबल, गुरुग्रंथ) भी "लिखकर" भेजी है। और इस "स्क्रिप्ट" में साफ़-साफ़ ये बता दिया है कि हमें ज़िन्दगी के इस रंगमंच पर "किस तरह अभिनय करना है, अब ये हमारे ऊपर है कि हम जीवन के इस रंगमंच के मंच पर ख़ुदा की भेजी हुई "स्क्रिप्ट" के "मुताबिक" अभिनय करते हैं या "अपनी मर्ज़ी" से "अलग-थलग" होकर अपने "डायलॉग" बोलते हैं। लेकिन कुछ भी करें एक दिन हमें अपने अभिनय की इस Performence का हिसाब अपने Director उस ख़ुदा को ज़रूर देना होगा, और हमारी Performence के हिसाब से ही वो हमें हमारा ईनाम देगा।। (बस दोस्तों इतना ज़रूर याद रखें)          (शुक्रिया)
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*लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद*
संस्थापक/अध्यक्ष 
"इन्सानियत वेलफेयर सोसाइटी"

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