Thursday, December 8, 2016

***हालात, बदलाव, और स्वभाव***

"कहा जाता है कि हमें ज़िन्दगी जीने के लियें अपने स्वभाव(मिजाज़) को बदलना ही पड़ता है"।
"दरअसल बदलाव ज़िन्दगी की एक बड़ी सच्चाई है, लेकिन हमें कितना बदलना चाहिए इस पर भी गौर करना ज़रूरी है।
"असल में हमारे स्वभाव और बदलाव के बीच एक टकराहट चलती रहती है। हमें कितना सहज रहना चाहिए और कितना बदल लेना चाहिए ? यह मामूली सवाल नहीं है। ना तो सहज रहना आसान होता है, और ना ही अपने को बदल लेना आसान। हम जब सहज नहीं रह पाते, तो दुखी होते हैं। और जब वक़्त पर खुद को बदल नहीं पाते, तब भी दुखी होते हैं। 
असल में सहजता और बदलाव दोनों के बिना ज़िन्दगी नहीं चलती, इसलिए दोनों का तालमेल बहुत ज़रूरी है। अगर हम सिर्फ अपने स्वभाव का ही ख्याल रखेंगे, तो हालात हमें कही का नहीं छोड़ेंगे। और अगर हम महज़ बदलाव ही करते रहेंगे, तो अपनी खुद की पहचान कहीं रह ही नहीं पाएगी, और कुछ वक़्त के बाद हम खुद को ही पहचान नहीं पाएंगे।
"असल में हमें अपने स्वभाव के आसपास ही रहना चाहिए। वक़्त के मुताबिक हम उसमे थोडा-बहुत बदलाव कर सकते हैं, उससे कोई बहुत ज़्यादा असर नहीं पड़ता।
"हमारा शरीर बदलता है, हमें भी बदलना चाहिए। जब शरीर बदलता है, तब भी हम पहचान में आते हैं ना ? उसी तरह जब हम बदलते हैं, तो इतना नहीं बदल जाना चाहिए कि हमें पहचाना ही ना जा सके। हालात हमें बदलने को कहते हैं, तो हमें उस पर सोचना ही चाहिए, फिर यह तय करना चाहिए कि आखिर हमें कितने बदलाव की ज़रूरत है।
और तब उसके मुताबिक अपने स्वभाव में बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिए।
              (शुक्रिया)
(लेखक - राशिद सैफ़ी "आप" मुरादाबाद)