Sunday, November 20, 2016

संबंधों में औपचारिकता (Formalities)ठीक नहीं

"कहा जाता है कि आजकल हमारे समाज में "इंसानी रिश्ते" सिर्फ "औपचारिक" हो गए हैं। लोग जब भी एक-दूसरे से मिलते हैं, तो किसी "काम" से मिलते हैं, किसी "वजह" से मिलते हैं। किसी ने किसी को अगर फ़ोन भी किया, तो थोड़ी देर में ही पूंछते हैं- "कहिये कैसे फ़ोन किया" ? कोई अगर किसी से "मिलने" जाता है तो लोग सोचते हैं कि ज़रूर किसी "काम" से आया होगा, आदि।।
"दरअसल, आज हमारे समाज में लोग यह मान बैठे हैं कि "बिना काम" के किसी को कोई "याद" नहीं करता, और बिना "वजह" कोई किसी से मिलता भी नही। और ये सोचने की "वजह" ये होती है क्योंकि आजकल किसी के पास "समय" ही नहीं है, अकारण किसी से मिलना, लोगों को "समय की बर्बादी" मालूम होती है। और इसी "सोच" की वजह से हम लोगों से गहराई से, या "दिल-से" नहीं जुड़ पाते, और हमारे रिश्ते, और "सम्बन्ध" सिर्फ "औपचारिकता" या "खानापूरी" बनकर रह जाते हैं।
"असल में, इंसान के लिये काम तो एक "बाहरी क्रिया" है, जो वह "आजीविका" के लिये करता है। लेकिन असल में इंसानी रिश्ते तभी बनते हैं, जब लोग "दिल-से" एक दूसरे से "सम्बंधित" हों, दिल-से एक दूसरे से "जुड़ें"। लेकिन आज की दुनिया में लोग इस "कला" को भूल गए हैं। आज की दुनिया में सभी लोग एक-दूसरे के लिएं एक "साधन" हैं। आज एक-दूसरे से एक इंसान की तरह कोई सम्बन्ध नहीं है, लोग एक-दूसरे को एक "चीज़" की तरह "इस्तेमाल" करते हैं, और बाद में "फेंक" देते हैं।
"तो मेरे दोस्तों, ये तो सच है कि हमारे जीवन में काम का भी अपना एक अलग "महत्व" है, लेकिन लोगों के साथ सिर्फ काम से जुड़ना "इन्सानियत" नहीं होती, काम तो दो व्यक्तियों को "तोड़ने" वाली चीज़ होती है, जोड़ने वाली नहीं, जहाँ कोई काम नहीं होता, वही हम लोगों से "दिल-से" जुड़ते हैं। इसलिए हमें और आपको चाहिए कि अपने जीवन में लोगों से अपने "संबंधों को सिर्फ औपचारिकता ना बनायें, बल्कि कभी-कभी समय निकाल कर लोगों से "दिल-से" से "जुड़ने" की कोशिश करें, और यक़ीन मानें ऐसा करने से जीवन "आनन्द" से भर जायेगा। (धन्यवाद)
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(लेखक - राशिद सैफी "आप" मुरादाबाद)

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